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    आगरा: थाना ईरादतनगर क्षेत्र में गायों की स्थिति बदहाल, जनप्रतिनिधियों व गौरक्षको का नहीं कोई अता पता।

     गौमाताओं के नाम से गौशाला बना  करते हैं अनुदान का बंदरबाट 


    ब्यूरो रिपोर्ट लक्ष्यसीमा न्यूज़।

    आगरा।। मामला आगरा के थाना इरादतनगर मौजा थाप महाद्वारी गुलवा पुरा का है जहाँ सरकार के दिये अनुदान को काला पीला करने हेतु कटीली तार बाउंड्री एवं करेंट से अस्थाई गौशाला बनाकर लगभग 400 से अधिक गायों को रखा गया। 

    जो कि पर्याप्त चारा और पानी के अभाव में कीकर बबूल और अन्य पेड़ों की जड़ों को खाकर कुछ समय तक ही चल पाईं,लेकिन कुछ समय से तो वो सब भी खत्म हो चुका है। इसलिये गौशाला में गायें पिछले कुछ समय से खाने पीने की समुचित व्यवस्था एवं देख रेख के अभाव में भूखी प्यासी बुरी तरह तड़प तड़प कर दम तोड़ रहीं हैं। जिनकी दुर्दशा देख मानवता शर्मसार हो रही है, अब तक लगभग 150 गाय मर चुकी हैं। हिन्दू धर्म में आस्था की प्रतीक मानी जाने वाली गौमाता को दफनाने की कोई व्यवस्था भी नहीं है,और ना ही उनके लिए कोई पशु चिकित्सक की व्यवस्था है।

    हद तो तब हो गई कि जब कुछ जिंदा अथवा अधमरी गायों की आँखों को कौए नोंच रहे थे और कुत्ते खींच खींच कर खा रहे थे। तो वहीं अन्य गायें भी मौत का इंतजार कर रहीं हैं।

    एक तरफ योगी सरकार गायों की दशा सुधारने के लिए तमाम दावे कर रही है और नए-नए उपक्रम कर रही है तो दूसरी तरफ उनकी दशा को सुधारने के जिम्मेदारों की भीषण लापरवाही सरकार के तमाम दावों को झूठा साबित कर रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गाय को गौमाता के रूप में मान्यता दी गई है लेकिन ये सब राजनीति चमकाने तक ही सीमित रह गया है, अब ना तो ये चुनावी एजेंडे में है और ना ही सरकार के एजेंडे में अब तो केवल छोड़ दिया है गौमाता को अपने हाल पर फिर वे चाहें भूखी प्यासी मरें कुत्ते खायें,कौये नोचें अथवा सड़े।

      स्थानीय लोगों का कहना है कि पशुओं के चारे के लिए जो पैसे मिलते हैं,वे कमीशनखोरी में ही खत्म हो जाते हैं। गौमाताओं की ये दुर्दशा देख कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की बू आ रही है। जिस कारण आसपास के प्रधानों क्षेत्रीय विधायक एवं मा0 सांसद जी पर भी उँगली उठना लाजिमी है।


    गाय की मौत व कौए द्वारा आंख नोचने की जानकारी मिलने पर ठार मंगल नगर( चंदीपुरा) निवासी पशुप्रेमी किसान सुंदर सिंह निषाद अपने बेटे चिरंजीवी और अन्य युवाओं को ले मौके पर पहुंचे और उन्होंने मृत पड़ी गायों को गड्डा खोदकर दफनाया और बची हुई गायों के लिए चारे/पानी एवं चिकित्सक की समुचित व्यवस्था हेतु प्रधान राम प्रकाश से बात की लेकिन अब तक कोई भी सकारात्मक प्रयास दिखाई नहीं दे रहा है।

    अब सवाल ये है कि क्या धर्म के ठेकेदार,गौरक्षक एवं जनप्रतिनिधि उठायेंगे कोई ठोस कदम या यूँ ही मरती रहेंगी सैकड़ों भूखी/प्यासी गौमाता चारों तरफ से घिरी तार बाउंड्री एवं बिजली करेंट के बीच, क्या यूँ ही होती रहेगी मानवता शर्मसार क्या यूँ ही जिंदा एवं अधमरी गाय की आंखें नोंचते रहेंगे कौए और कुत्ते।

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